Subhas chandra bose biography in hindi. Subhas Chandra Bose 2019-01-07

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नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जीवनी

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Bose was advised by Gandhi to work under , a politician in. He was warmly received in Japan and was declared the head of the Indian army, which consisted of about 40,000 soldiers from Singapore and other eastern regions. आनर्स दर्शन-शास्त्र करते समय सुभाष चन्द्र बोस के जीवन में एक घटना घटी। इस घटना ने इनकी विचारधारा को एक नया मोड़ दिया। ये बी. The incident brought Subhash in the list of rebel-Indians. In November 1941, his broadcast from German radio sent shock waves among the British and electrified the Indian masses who realized that their leader was working on a master plan to free their motherland.


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Life History of Subhash Chandra Bose : Father of the Indian Freedom

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की परीक्षा के लिये केवल 8 महीने थे और उम्र के अनुसार ये इनका पहला और आखिरी मौका भी था। इनका जहाज निर्धारित समय से एक हफ्ते बाद इंग्लैण्ड पहुँचा। ये 25 अक्टूबर को इंग्लैण्ड पहुँचे थे। इंग्लैण्ड पहुँचने से पहले ही इनका अध्ययन सत्र शुरु हो गया जिससे किसी अच्छे कॉलेज में प्रवेश का मौका मिलना भी कठिन था। अतः अपनी इस समस्या को लेकर सुभाष चन्द्र बोस इंडिया हाऊस के भारतीय विद्यार्थियों के सलाहकार से मिलने गये। इस मुलाकात से इन्हें भी निराशा ही हाथ लगी। चारों ओर से किसी भी प्रकार के सहयोग की उम्मीद न होने पर ये सीधे कैंम्ब्रिज यूनिवर्सिटी गये। किट्स विलियम हॉल के सेंसर परीक्षा में बैठने वाले छात्रों की योग्यता का आंकलन करने वाला बोर्ड ने इनकी समस्याओं को देखते हुये प्रवेश कर लिया और 1921 जून में होने वाली परीक्षा के लिये छूट भी प्रदान कर दी। सिविल परीक्षा निकट होने के कारण इन्होंने अपना सारा समय तैयारी में लगा दिया। मानसिक और नैतिक विज्ञान आनर्स की तैयारी के लिये लेक्चर लेने के साथ ही अपने पाठ्यक्रम से संबंधित इंडियन मजालिस और यूनियन सोसायटी के कार्यक्रमों में भाग भी लेते थे। अपने लेक्चर के घंटों के अतिरिक्त भी इन्हें पढ़ाई करनी पड़ती थी, जितनी मेहनत से ये पढ़ाई कर सकते थे उतनी मेहनत से पढ़ाई की। पुरानी सिविल सर्विस के रेंग्युलेसन के अनुसार इन्हें लगभग 8-9 अलग-अलग विषयों को पढ़ना होता था। अपनी पढ़ाई के साथ-साथ ही इन्होंने वहाँ के बदले हुये परिवेश को बहुत ध्यान से देखा। इंग्लैण्ड में विद्यार्थियों को प्राप्त स्वतंत्रता, सम्मान और प्रतिष्ठा ने इन्हें बहुत प्रभावित किया क्योंकि यहाँ की परिस्थिति भारत की परिस्थितियों से बहुत ज्यादा अलग थी। ये यहाँ यूनियन सोसायटी के वाद-विवाद आयोजनों में सांसदों या मंत्रियों की उपस्थिति में बिना किसी डर के अपने विचारों को रखते थे। इन्होंने देखा कि राजनीतिक दलों में लेबर पार्टी के सदस्य भारतीय समस्याओं के लिये दया भाव रखते थे। इंड़ियन सिविल सर्विस की परीक्षा जुलाई 1920 में शुरु हुई और लगभग एक महीने तक चली। सुभाष चन्द्र बोस को परीक्षा में पास होने की कोई उम्मीद नहीं थी अतः अपने घर के लिये चिट्ठी लिखी कि इन्हें अपने पास होने की कोई उम्मीद नहीं है और ये अगले साल की ट्राईपास की तैयारी में लगे हुये हैं। सितम्बर के मध्य में जब रिजल्ट आया तो इनके मित्र ने इन्हें तार द्वारा बधाई दी। अगले दिन इन्होंने अखबार में आई. In December 1921, Bose was arrested and imprisoned for organizing a boycott of the celebrations to mark the Prince of Wales' visit to India. Bose forego the hard-earned, lucrative job and came back to India, where he joined the Indian National Congress to contribute in the Independence struggle. On October 21, 1943, Bose proclaimed the establishment of a provisional independent Indian government, and his so-called Azad Hind Fauj , alongside Japanese troops, advanced to Rangoon and thence overland into , reaching Indian soil on March 18, 1944, and moving into and the plains of. Soon people began to report sighting of the hero and even Gandhi expressed his scepticism about death of Bose. In this way the political differences that separated him from the Mahatma Gandhi, whose peaceful civil disobedience strategy was considered insufficient, began to be made public. Subhash Chandra Bose was a very intelligent and sincere student but never had much interest in sports.


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सुभाषचन्द्र बोस Subhash Chandra Bose Life Essay in Hindi

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ये जानकारी नहीं देते लेकिन ये बहुत रोचक है नेताजी जब ऑस्ट्रिया में सन् 1934 में अपना चिकित्सा करवाने ठहरे हुए थे। तब उन्होंने अपने जीवनी पर एक पुस्तक लिखने के लिए एक अंग्रेजी टाईपिस्त की आवश्यकता पड़ी उस समय उनके दोस्त ने उनको एक एमिली शेंकल नाम की एक ऑस्ट्रियन लड़की से परिचय करवारा। एमिली के पिता एक पशु डाक्टर थे। सुभाष को एमिली की और आकर्षित हुए और एमिली भी सुभाष से काफी प्रेरीत हुई उनकी जीवनी जानकर। इसी कारण दोनों प्रेम हो गया। लेकिन जर्मनी के कानून को बड़े ही सख्त थे जिनका पालन करना अनिवार्य था। कानूनों के कारण सन् 1942 में गास्टिन नाम के स्थान पर हिन्दू रिती-रिवाज़ से विवाह रचा दिया। एमिली ने एक पुत्री को वियेना नाम के शहर में जन्म दिया। जब सुभाष से उसे पहली बार देखा तो वह सिर्फ 4 सप्ताह की थी। पुत्री का नाम अनिता बोस रखा गया। नेताजी की मृत्यु एक राज़ Secret Files of Netaji Bose Death उनकी मृत्यु आज की एक पहेली बनी हुई है। लेकिन तथ्य और जो आंकडें जो 99 हिन्दी को प्राप्त हुए उनमें जब नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने जापान की हार के बाद रूस से सहायता मॉंगने के लिए 18 अगस्त 1945 को हवाई जहाज से मंचूरिया की तरफ रवाना हूए, तो इस सफर के दौरान उनके लापता होने की खबरें ही है। उसके बाद से उनको किसी ने नहीं देखा ना ही वे कई पर दिखाई दिए। 23 अगस्त 1945 को टोकियो के रेडियों स्टेशन के यह सुचना दी गई की नेताजी एक बड़े विमान से पहूँच रहे थे ताइहोकू जापान का एक हवाई अड्डा के पास विमान क्षतिग्रस्त हो गया साथ ही विमान में मौजूद जापान के जनरल पाइलेट कुछ और अन्य लोग भी मारे गए! हमारे वीर महापुरुषों ने अपने प्राणों की आहुति देकर देश की एकता, अखण्डता को कायम रखा जिसके लिए आने वाली पीढ़ी उनके योगदान को हमेशा याद रखेगी. दुश्मन ने हमारा जो खून बहाया है, उसका बदला सिर्फ खून से ही चुकाया जा सकता है. Shortly thereafter he and became the two general secretaries of the Indian National Congress. A little more than a year after the invasion of , Bose left Germany, traveling by German and Japanese and by , and arrived in May 1943 in. This insulted Gandhi group, which lead to their less interest of thinking towards parties campaign for independence.

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सुभाषचंद्र बोस की जीवनी

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They were now inside India and were determined to drive out the British!. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. However, you can change your cookie settings at any time. प्रथम वर्ष के कुछ छात्र शोर कर रहे थे, लेक्चर में बाधा उपस्थित करने के जुर्म में प्रोफेसर ने पहली लाइन में लगे छात्रों को निकाल कर पीट दिया था। सुभाष चन्द्र अपनी क्लास के प्रतिनिधि थे। इन्होंने छात्रों के अपमान करने की इस घटना की सूचना अपने प्रधानाचार्य को दी। अगले दिन, इस घटना के विरोध में छात्रों द्वारा कॉलेज में सामूहिक हड़ताल का आयोजन किया गया, जिसका नेतृत्व सुभाष चन्द्र बोस ने किया। ये कॉलेज के इतिहास में पहली बार था जब छात्रों ने इस प्रकार की हड़ताल की थी। हर तरफ इस घटना की चर्चा हो रही थी। मामला अधिक न बढ़ जाये इसलिये अन्य शिक्षकों और प्रबंध समिति की मध्यस्था से उस समय तो मामला शान्त हो गया, लेकिन एक महीने बाद उसी प्रोफेसर ने दुबारा इनके एक सहपाठी को पीट दिया जिस पर कॉलेजों के कुछ छात्रों ने कानून को अपने हाथों में लिया जिसका परिणाम ये हुआ कि छात्रों ने प्रोफेसर को बहुत बुरी तरह पीटा। समाचार पत्रों से लेकर सरकारी दफ्तरों तक सभी में इस घटना ने हलचल मचा दी। छात्रों पर ये गलत आरोप लगाया गया कि प्रो. With the aim to initiate a mass movement, Bose called out to Indians for their whole-hearted participation. During the time he traveled the continent he sought to reclaim the support of Western governments for Indian independence and wrote his book The Struggle of India, 1920-1934. He was cremated on August 20 in Taihoku Crematorium and his ashes were laid to rest at the Renk? But the lack of support from the prestigious independence leader left him incapable of acting within the Party and forced his resignation.

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Netaji Subhash Chandra Bose Biography

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Together they represented the more militant, left-wing faction of the party against the more compromising, right-wing Gandhian faction. मांटेग्यू को पत्र लिखकर परिवीक्षाधीन अफसरों प्रोबेशनर्स की सूची से अपना नाम वापस लेने की घोषणा कर दी। आई. His sudden disappearance post 1945, led to surfacing of various theories, concerning the possibilities of his survival. यदि आपके पास Hindi में कोई article, inspirational story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. He was admired within the congress for his great ability in organization development. Rash Behari Bose handed complete control of the organisation.


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Life History of Subhash Chandra Bose : Father of the Indian Freedom

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Cole, and Sir Stafford Cripps. Though he did not achieve much success in his effort, his determination and hard work are nevertheless commendable. Otten for his racist remarks, brought him notoriety as a rebel-Indian in eyes of the government. Activity in exile In Germany Bose came under the tutelage of a newly created Special Bureau for India, guided by Adam von Trott zu Solz. व्यास, गिरिजा मुखर्जी और एन. अर्कहार्ट से मिले और उन्हें बताया कि वो दर्शन शास्त्र में आनर्स करना चाहते है। अर्कहार्ट बहुत ही व्यवहार कुशल और दूसरों की भावनाओं का ख्याल रखने वाले व्यक्ति थे। वो सुभाष के व्यवहार से प्रभावित हुये और उन्हें प्रवोश की अनुमति दे दी। डॉ. Bose was placed fourth with highest marks in English.

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सुभाषचंद्र बोस की जीवनी

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However, the findings were rejected by the Government of India. सुभाषचन्द्र बोस भारतीय इतिहास के ऐसे युग पुरुष हैं जिन्होंने आजादी की लड़ाई को एक नया मोड़ दिया था. Congress party was always lenient and never in a position to oppose. His sudden disappearance from Taiwan, led to surfacing of various theories, unfortunately none of which were investigated thoroughly by successive governments; leaving people in the dark about one of the most beloved leaders India has ever produced. They believed whole heartedly that it was just a matter of time that Netaji will gather up his army and conduct a march towards Delhi. His father wanted Netaji to become a civil servant and therefore, sent him to England to appear for the Indian Civil Service Examination.


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नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जीवनी Biography Of Subhash Chandra Bose In Hindi

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The government of India set up a number of committees to investigate the case and come out with truth. की परीक्षा देना चाहेंगे। अपने पिता के इस फैसले से इन्हें बहुत झटका लगा। इनकी सारी योजनाओं पर पानी फिर गया। इन्हें अपना निर्णय बताने के लिये 24 घंटे का समय दिया गया। इन्होंने कभी अपने सपने में भी अंग्रेज सरकार के अधीन कार्य करने के लिये नहीं सोचा था, लेकिन परिस्थतियों के सामने मजबूर होकर इन्होंने ये निर्णय ले लिया। इनके इस निर्णय के बाद एक सप्ताह के अन्दर ही पासपोर्ट बनवाकर इंग्लैण्ड जाने वाले जहाज पर व्यवस्था करा कर इनको भेज दिया गया। वो भारत से इंग्लैण्ड जाने के लिये 15 सितम्बर को रवाना हुये। प्रशासनिक सेवा की तैयारी इंग्लैण्ड जाकर आई. He is known for his political acumen and military knowledge and his struggle which he often referred to as a moral crusade. Army leadership, administration and communications were managed by Indians only. Dispute with the Congress In 1928, during the Guwahati Session of the Congress, a difference of opinion surfaced between the old and new members of the Congress. To him, it made no sense to further bleed poor Indians for the sake of colonial and imperial nations.

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